तेजस्वी यादव के जमीनी मुद्दों और राहुल के राष्ट्रीय अनुभव का गठजोड़ NDA को दे सकता है चुनौती

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देश :- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सियासी घमासान तेज हो गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 29 अक्टूबर को राजद नेता तेजस्वी यादव के साथ मुजफ्फरपुर और दरभंगा में एक संयुक्त रैली को संबोधित करेंगे. चुनाव की घोषणा के बाद राज्य में यह उनकी पहली रैली होगी. इस रैली को चुनाव से ठीक पहले विपक्षी INDIA ब्लॉक की एकजुटता के सबसे बड़े प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है

राहुल की वापसी और कांग्रेस की रणनीति

राहुल गांधी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब चुनाव प्रचार में उनकी अनुपस्थिति एक बड़ा मुद्दा बन गई थी. इससे पहले वे 1 सितंबर को अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के समापन पर पटना आए थे, जिसने महागठबंधन के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाया था. कांग्रेस पार्टी ने छठ पूजा के ठीक बाद अपने अभियान को तेज करने की रणनीति बनाई है. जिसकी कमान खुद राहुल गांधी संभालेंगे. पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की एक बड़ी सूची जारी की है, जिसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, सचिन पायलट, कन्हैया कुमार और भूपेश बघेल जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

चुनाव पर कितना पड़ेगा असर?
राहुल गांधी की वापसी को महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब तक तेजस्वी यादव अकेले ही प्रचार की कमान संभाले हुए थे. जहां एक तरफ तेजस्वी यादव लगातार रोजगार, पलायन और कानून व्यवस्था जैसे जमीनी मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं राहुल गांधी ने हाल ही में त्योहारों के दौरान बिहार जाने वाली ट्रेनों में भीड़ को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी के जमीनी मुद्दों और राहुल के राष्ट्रीय अनुभव का यह मेल NDA के लिए एक मजबूत चुनौती पेश कर सकता है. हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संयुक्त रैली वोटरों को कितना प्रभावित कर पाती है, खासकर तब जब मतदान के लिए दो सप्ताह से भी कम समय बचा है.

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